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“विषमुक्त भारत” इस नाम से बनी फर्म की स्थापना नीरज कुमार जोशी, पुत्र श्री पूरन चंद्र जोशी के द्वारा विक्रम संवत 2078 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की गई। इस फर्म को “विषमुक्त भारत” नाम देने का मुख्य उद्देश्य भाई राजीव दीक्षित जी से प्रभावित होना और उनके विचारों को धरातल पर उतारने का प्रयास करना है। मुझे साल 2009 में अपनी इंजिनियरिंग की पढाई के दौरान भारत स्वाभिमान के किसी कार्यक्रम में भाई राजीव दीक्षित को सुनने का मौका मिला और राजीव भाई से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका। बाद में राजीव भाई की मृत्यु के पश्चात भी मेरा राजीव दीक्षित मेमोरियल ट्रस्ट से संपर्क बना रहा और वहीं मुझे इस कंपनी को बनाने की प्रेरणा मिली।

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भाई राजीव दीक्षित जी के बारे में दो शब्द –

स्वदेशी के प्रखर प्रवक्ता भाई राजीव दीक्षित जी का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद के अनरौली तहलीस के नाह गांव में तीस नवम्बर १९६७ में हुआ । ३० नवम्बर २०१० में भारत स्वभिमान आंदोलन के दौरान भाई राजीव दीक्षित जी की रहस्यमई परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। चूंकि उस वक्त पोस्टमार्टम न हो पाने के कारण आज भी उनकी मृत्यु रहस्य ही बनी हुई है।राजीव भाई जी की इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा ग्रामीण परिवेश में हुई । उनके पिता का नाम श्री राधेश्याम दीक्षित और माता का नाम श्रीमती मिथिलेश कुमारी था। राजीव भाई के जीवन में सरलता और नम्रता थी। वे संयमी, सदाचारी, ब्रह्मचारी तथा बलिदानी थे। वे निरन्तर साधना की जिन्दगी जीते थे। राजीव भाई वर्षों से बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बहुराष्ट्रीय उपनिवेशवाद के खिलाफ तथा स्वदेशी की स्थापना के लिए संघर्ष कर रहे थे। वे भारत को पुर्नगुलामी से बचाना चाहते थे।

उनकी प्रारम्भिक व माध्यमिक शिक्षा फ़िरोज़ाबाद में हुई उसके बाद 1994 में उच्च शिक्षा के लिए वे इलाहबाद गए। वे सेटेलाइट टेलेकम्युनिकेशन में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते थे लेकिन अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़ कर देश को विदेशी कंपनियों की लूट से मुक्त कराने और भारत को स्वदेशी बनाने के आंदोलन में कूद पड़े। शुरू में भगतसिंह, उधमसिंह और चन्द्र शेखर आज़ाद जैसे महान क्रांतिकारियों से प्रभावित रहे। बाद में जब गांधीजी को पढ़ा तो उनसे भी प्रभावित हुए। अंग्रेज़ भारत क्यों आए थे, उन्होने हमें गुलाम क्यों बनाया, अंग्रेजों ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता, हमारी शिक्षा और उद्योगों को क्यों नष्ट किया, और किस तरह नष्ट किया इस पर विस्तार से जानकारी दी ताकि हम पुनः गुलाम न बन सकें।

अपने जीवनकाल में राजीव भाई ने लगभग 15000 से अधिक व्याख्यान दिये जिनमे से कुछ हमारे पास उपलब्ध है। आज भारत में 5000 से अधिक विदेशी कंपनियाँ व्यापार करके हमें लूट रही है, उनके खिलाफ राजीव भाई ने स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की। 1991 में डंकल प्रस्तावों के खिलाफ घूम-घूम कर जन-जागृति की और रेलियाँ निकाली। कोका कोला और पेप्सी जैसे पेयों के खिलाफ अभियान चलाया और कानूनी कार्यवाही की। 1991-92 में राजस्थान के अलवर जिले में केडीया कंपनी के शराब कारखानों को बंद करवाने में भूमिका निभाई। 1995-96 में टिहरी बांध के खिलाफ ऐतिहासिक मोर्चा और संघर्ष किया जहां भयंकर लाठी चार्ज में काफी चोटें आई। उसके बाद 1997 में सेवाग्राम आश्रम, वर्धा में प्रख्यात गांधीवादी इतिहासकार श्री धर्मपाल जी के सानिध्य में अंग्रेजों के समय के ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन करके देश को जागृत करने का काम किया।

 

राजीव भाई को सच्ची श्रद्धांजलि

हालांकि स्व भाई राजीव दीक्षित अब हमारे बीच नहीं रहे, परन्तु उनका जीवन ही हमारे लिए प्रेरणा बनकर राह दिखाता रहेगा। हमें उनके द्वारा देखे गए स्वप्न के अनुरूप भारत का निर्माण करना है। आज हम संकल्प ले की विदेशी वस्तुओ को त्याग कर स्वदेशी वस्तुओ और स्वदेशी कंपनियो को बढावा देगे। यही हमारी भाई राजीव दीक्षित जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हमारा उद्देश्य परम पूजनीय स्व भाई राजीव दीक्षित जी के सिद्धांतों पर चलते हुए रासायनिक खेती के खिलाफ कार्य करना और भारतीय जन मानस को रसायन मुक्त (केमिकल फ्री) उत्पाद उपलब्ध करवाना है। साथ ही जो किसान और छोटे स्तर के उद्योगपति हैं उनको उनके उत्पादों की गुणवत्ता (क्वालिटी) सुनिश्चित करते हुए मार्किट की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है। हमारे इस कार्य में देशी गाय का दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालक और रसायन मुक्त खेती करने वाले किसान हमारे चैनल पार्टनर की तरह कार्य करेंगे।